अखिर क्यूं दुनिया का सबसे अटूट रिश्ता खोखला होता जा रहा है … क्या अब मा बाप पराए होगए ???

ज़िंदगी की कश्मकश में बहुत कुछ छुट जाता है …
या यह कहे की हम ही कुछ ज़्यादा आगे बड़ जाते है …
कुछ पुराने रिश्ते कुछ पुराने जज़्बात …
और कुछ तो इन्सानो कोही भुल जाते है …

किसी ने ठिक ही कहा है …
आजकल तु जनाज़े में भीलोग जाते है तो सिर्फ अपनी हज़री गिनवाने…

मां बाप से रिश्ता कुछ अनोखा सा होता है …
फिर क्यू हम जब अपने पैरो पर खडे हो जाते है तो अपने ही मा बाप पराए लगने लगते है…… जब मा बाप को सहारा चाहिये तो लोग क्युं कहते है की अब भगवान इन्हे उठा ले तो ही  ठिक है ……

जब हम चलना भी नही जानते थे तब मा बाप ने हमे कान्धे पर घुमाया…

और आज जब उन्हे मात्र सहारा चाहिये तो बच्चे उन्हे कन्धा देने को तैयार है पर सहारा देना बोझ होगया है ……

क्या हमे नही लगता ., दुनिया का ये अटूट रिश्ता कही खो गया है ………

एक बार सोचीए … कही आपकी छोटी छोटी बातो पर गुस्सा करने की आदत इस दुनिया के भगवान को आपसे दूर ना कर दे ……

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Yogesh Ojha

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