ज़िंदगी भी छोड़ देती है साथ…

चाहतों की डोरी भी तोड़नी ही पड़ती हैं…
मनज़िलों की कश्ती भी मोड़ना ही पड़ती है…

भूलना ही पड़ता है
जान से प्यारे लोगो को भी…

नक्ष उनकी तस्विरें भी जोड़नी ही पड़ती है.…

कुछ हसीन अफ्सानो को भी
भुलना ही पड़ता है.…

पाओं में थी जो बैडीयां
उन्हे भी तोड़ना ही पड़ता है …

खूबसूरत आंखो में बसने वाले ख्वाबो को भी…
बरसती आंखे बहा देती है …

साथ ज़िंदगी भी एक दिन छोड़ ही देती है …
क्यूकी …
हर वादा कभी पुरा नही होता …
और …
हर कश्ती को नसीब साहिल नही होता ………

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Yogesh Ojha

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