काश ज़िंदगी ही एक किताब होती …

काश ज़िंदगी ही एक किताब होती…
शायद फ़िर,
ज़िंदगी में खुशिया…
बेशुमार होती…

ना होती तन्हाइ नसीब
किसिको…

 

ना ही आंखो से मोतियों की
बरसात होती …

ना जाता कोई अपना हमसे दुर कभी …
मां पापा की उमर भी हज़ार होती …

काश प्यार की कहानी की भी
एक किताब होती…
हर रूह में छुपे अरमानो की
एक ज़ुबां होती …

ना तड़पता कोइ कभी
किसी भी ग़म में…
ना पुकारता कोई नाम वादियो पर
फिर भी पुरी हर मुराद होती ……

Yogesh Ojha

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