एक खत मा पापा के नाम …

यूं तो भीड़ बहुत है आस पास
पर मै अकेला रहना चाहता हुं...

कहने को तो बहुत है अपने…
पर कुछ दोस्तो के साथ दो कदम चलना चाहता हूं …

नही बनना मुझे बड़ा आदमी
पर हां
मै कुछ अलग करना चाहता हूं …

माना मै नही हूं किसी लायक
पर मां
मै एक अच्छा इंसान बनना   चाहता हूं …

नही चाहिये
ज़िंदगी से कुछ
बस खुदकी ज़िंदगी
बदलना चाहता हूं … …

पापा मै
आज़ाद होकर उड़ना चाहता हूं…
अपनी मंज़िल पाना चाहता हूं …

नही चाहता मै बसा बसाया घर और मेहंगी गाडियां
मै खुद अपनी दुनिया संजोना चाहता हूं …

क्या करून्गा दौलत का
जब आप ना रहोगे साथ …
मै पापा के साये मे जीना
और मां की गोद मे मरना चाहता हूं …………

image

Yogesh Ojha

We are providing the best content out of the box.