बेटिया मा की परछाई होती है

बेटी तो मा की परछाई होती है…
फिर दूर होने पर
ऐसे क्यू रोती है…
जब पायल उसकी गुंज उठती है
तो दिल को एक सुकुन सा देती है …
और देखते ही देखते
उम्र की सीढीया चड़ कर…
अपना घर आन्गन समेट लेती है …

बेटिया जब भी सोई रहती है
मा प्यार से सर पर हाथ फेर कर कहती है …
मेरी बेटी कितनी बडी होगई…
एक दिन ये भी मुझे छोड़ कर चली जाएगी …
कही आप जाने अंजाने मे इतना प्यार करने वाली मा को गलत तो नही कह देती है ???

कहते है
मा बेटी का रिश्ता अनोखा होता है …
बेटिया मा की परछाई होती है …
पर
मा कभी हमारी तरह नाराज़ क्यू नही होती …
मा बेटी की इस अनोखी डोर को संजोए रखना ज़िंदगी मे  यही एक सलाह है……

माना की मा बेटे का बंधन भी अनोखा है…
पर बेटिया मा की परी होती है…
काश मै भी मा की परी होती ……

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Yogesh Ojha

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