मुझे कुछ और कहना था..

वो रुकता तो मैं कहता को, 

मुझे कुछ और कहना था,

पल भर वो रुक जाता , 

मुझे कुछ और कहना था...

कमाई जिंदगी भर की,

 उसके नाम कर दी ,


मुझे कुछ और कहना था, 

मुझे कुछ और कहना था।

कहां हमारी सुनी , 

सुनी अनसुनी कर दी ,


उसे मालूम था इतना, 

मुझे कुछ और कहना था।

मेरे दिल में एक दर्द सा था 


या कुछ कमी थी हमारे दर्मीयां 


वहीं इक राबता टूटा 


मुझे कुछ और कहना था... 


था प्यार नस नस में ,


पर 


उसे कुछ और सुन्ना था मुझे कुछ और कहना था, 


मुझे कुछ और कहना था... 

गलत फ़हमी ने बातो को बढा दिया वर्ना ,


कहा कुछ था

, कुछ समझा , मुझे कुछ और कहना था.... 

Yogesh Ojha

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