हे विधाता !!

An Must Read Poem on Petlawad Incident :


पेटलावद हादसा 
हे विधाता !!
निर्मल मन बच्चे भी,
भविष्य के सुनहरे सपने।
कुछ परायी पीर संगकुछ सुख दुःख सगे अपने।
लम्बी दुरी तय कर के,
गुजर रहे कुछ अजनबी राह।
कुछ रुके हुए थे वही,
अलमस्त फक्कड़ बेपरवाह।
मेहनत रुक गयी देख,
भीड़ भरी छोड़ पगडण्डी।
कुछ पसीना बेच आये,
कुछ जा रहे शायद मण्डी।
वादा किसी से किया जोनिभाने जा रहा होगा कोई।
कोई पाठ याद करने,
नन्ही गुड़िया रात भर न सोई।
उम्मीदे चीथड़े हुई,
बिखर गयी लोथड़ों में आशा।
एक पल में मृत्यु हुई,
जीवन की प्यारी परिभाषा।
सो गया प्रातः ही,
न केवल पेटलावद का भाग्य,
कई पिता माता बच्चे,
मातम हुए कितने ही सद्भाग्य।
हे विधाता!
तेरी अदालत में आज,
अन्याय हो गया देख ज़रा।
विदीर्ण हुई ममता भी,
विकल हो गयी धैर्य धरा।
हे विधाता!
असमय जिन्हें बुला लिया,
उन्हें शरण दे अपने श्रीधाम,
शक्ति सम्बल साहस दे,
जो अश्रु बहा रहे अविराम।
हे विधाता!!!!
श्रद्धांजलि सभी दिवंगत आत्माओ को 


This Poem is Posted by : Gourav G Joshi, Lives in Petlawad !

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