प्यार का मीठा एहसास दिलाने लगा है तू...

प्यार का मीठा एहसास
दिलाने लगा है तू
मुझ को मुझ ही से
चुराने लगा है तू....

तेरी चाहतों का छाया है
सुरूर इस कदर
हर पल हर जगह
नज़र आने लगा है तू...

वीरान थी ये ज़िंदगी
तेरे आने से पहले
खुशियों के सपने मुझे
दिखाने लगा है तू....

हर पल मुझे होता है
बस तेरा ही एहसास
इस कदर मेरी सांसो में
समाने लगा है तू....

एक पल की भी दूरी
सह नहीं पाता
यूं आंख मिचौली खेल कर
क्यूँ मुझे आज़माने लगा है तू.....

तेरी यादों से ही अक्सर
होता है दिल खुश मेरा
घुल के लहू में
नस नस में समाने लगा है तू....

जाने कौन सी डोर है
जो खींच कर ले जाती है तेरी ओर
क्यूँ रूह में मेरी
समाने लगा है तू.....

बता क्या नाम दू मैं
इस दीवानगी को
बेचैन करके हर लम्हा मुझे
तङपाने लगा है तू...

तेरे ख्यालों से ही
महकने लगती है ज़िन्दगी
कुछ इस कदर मेरे दिल पर
छाने लगा है तू...

ये भोलापन
ये सादगी
और
तेरी मासूमियत
मुझे अब हर अदा से
सताने लगा है तू...

ज़िंदगी की राहों में
धूप में थी हर तरफ
अपने प्यार की बारिश को
बरसाने लगा है तू...

क्या इस बात का तुझे "एहसास "  है
ऐ जान
मेरे हर शेर
हर गज़ल में आने लगा है तू...

Yogesh Ojha

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