काश ज़िंदगी में वो पल ना आया होता...

उस रोज़ ना मैं वो गलती करता...

ना मैंने तुम्हे देखा होता... 

ना तुम्हे अपनी दोस्त बनाया होता...

ना हमने कभी बात की होती...

ना हमारी कोई मुलाकात हुई होती...

ना इस दोस्ती  में प्यार समाया होता...

ना तुमने मुझे जीना सिखाया होता...

ना तुमने मुझे सीने से लगाया होता...

ना तुमने मुझे ख्वाब दिखाये होते...

ना मेरी रूह में कोई उम्मीद का साँया होता...

ना हमारी ज़िंदगी में वो तूफान आया होता...

ना ये दील बिखर कर चूर होता...

ना बीच राह में ये साथ छूटा होता...

ना आज में तुम्हरे प्यार की आदात में खोया होता...

या काश,..

ना वो तूफान आया होता...

ना ये प्यार ज़ाया होता...

ना आज तुम्हरा नाम सुनकर यूँ रोते रोते मुस्कुराया होता...

काश
उस दिन मैं तुम्हे ना देखता...

ना तुम्हरी आवाज़ ने मुझे बुलाया होता...

आज यूँ कशमकश में ना होती मेरी ज़िंदगी...

गर ज़िंदगी में वो पल ना आया होता...

Yogesh Ojha

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