आखिर किस्मत ने उस शख्स से मिलाया ही क्यू ..

Poem by our user... Shriyanshi Jain
दिल तोडना ही था, तो सजाया क्यू ?
यू छोड़ना ही था , तो मिलया क्यू !
आजब सितंम करती है ये ज़िंदगी भी,
जब रुलना ही था , तो मुस्कुरना सिखाया क्यू |
हसना सिखाकर, वो साथ छोड गये|
चलना सिखाकर, वो हाथ छोड गये|
रोशनी दिखाकर, अँधेरे में छोड गये,,
और..,
रास्ता दिखाकर,अकेला ही छोड गाये|

ना मिलया होता, उस हसीन लम्हे को हमसे ,
ना चुराई होती , वो सारी बातें वो कसमे |
तो शायद ए- ज़िंदगी,...
हम  ठेहर भी जाते,
इस मंजऱ को सपना समझकर 
हम सम्भल भी जते,
अलग ही  मोड पर  ये लम्हा भी गुजर ही जाताb

काश ऐ ज़िन्दगी,
न मिलया होता उस अनमोल अपने को हमसे ||

Yogesh Ojha

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