मेरा क्या कसूर???

मेरा क्या कसूर

निगाहें तेरी कातिलाना हैं

इस में मेरा क्या कसूर?

खूबसूरत तू बेपनाह है

दीवाना मैं हो रहा हूँ

इस में मेरा क्या कसूर?

देखती हो जिस अदा से मुझको

प्यार तुमसे करने लगा हूँ

अपनी निगाहों को तुझे देखने से रोक ना पाऊँ

इस में मेरा क्या कसूर?

दिल कहता है कहीं और चल

पर कदम तेरी ओर खुद ही बढ़ जायें अगर

इस में मेरा क्या कसूर?

ख्वाब भी परेशन हैं

नींद भी हैरान है

मेरे सपनों में अब रोज़ रोज़ अगर तुम आओ

इस में मेरा क्या कसूर?

जब भी लिखता हूँ गीत कोई

अपने आप दिल की कहानी लिख जाती है ये मेरी कलम

इतना याद अगर तुम आओ

इस में मेरा क्या कसूर,

सहमे सहमे लबों से बोलना

शुरू कर दिया है तुमसे

पर ये ज़ुबान सिर्फ प्यार के ढाई अक्षर

अगर तुमसे कहना चाहे

इस में मेरा क्या कसूर?

Yogesh Ojha

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