December ठहर जाओ...!!

अभी लम्हे
नहीं बिखरे
अभी मौसम
नहीं बिछड़े
मेरे कमरे की
ठण्डक में
अभी कुछ धूप
बाकी है...

मेरी डायरी के
कुछ पन्ने
अभी कुछ
कह नही पाए
मेरे बेजान
होंठों पर
अभी मुस्कान
बाकी है...

December,
मॆरी बातों से
अगर
तुम मान जाओ
इन जज़्बातों से
अगर
तुम सहम जाओ..
December..
ठहर जाओ...
December..
ठहर जाओ....

Yogesh Ojha

We are providing the best content out of the box.