बुलाया मुझे फरिश्तों ने ...समय तेरा अब पूरा होगया..

बुलाया आज मुझे आसमान पर फरिश्तों ने ....

कहने लगे ...

मंज़िल अब तुम्हरी तुमसे दूरी नहीं ...

कहा मैंने ..

क्यूँ लाए हो  मुझे यहाँ ..

ऐसा कोई गुनाह मैंने किया तो नहीं ..

कहा फिर फरिश्तों ने ....

जन्नत की वादीया कर रही है तुम्हारा इंतज़ार ...
अब दुनियाँ में लौटने की ज़रूरत तुम्हे नहीं ...

कहा मैंने ....

शुक्रिया आपका ...
पर रहमत क्यों मुझ पर इतनी हो रही ...
मेरी ज़िंदगी,
मेरी शोहरत..इतनी भी मशहूर तो नहीं...

कहा फरिश्तों ने ...

ये सारा करम तो तेरी माँ का है ...
दुआओं में उसकी सिवाए तेरी खुशियों के कुछ और जिक्र नहीं ...
बिना उनकी दुआओं के तेरी ज़िंदगी का कोई दस्तूर नहीं  ....

कहा मैंने ...

रुको ज़रा एक पल ...
मै अपनी माँ को साथ ले लूँ..
उनका ख़याल रखने के लिये ...
सिवा मेरे कोई और भी तो नहीं  ....

कहा फरिश्तों ने .....

माफ़ करना तुम्हे यहाँ से अकेले जाना होगा ... वो साथ नहीं आ सकती ...
तुम्हारे साथ की वजह से उन्ही कोई ग़म तो नहीं.. .
जन्नत सिर्फ़ तुम्हरी ..
तुम्हरी तरह तुम्हरी माँ की उम्र कम तो नहीं  ...

कहा मैंने ...

कैसे सोच लिया माँ के बिना मै एक कदम भी जन्नत में रखूंगा ..
मेरी माँ के कदमों में ही तो सच्ची जन्नत ...
उसे मै कैसे ठुकरा दूँगा ....

कहा फरिश्तों ने ...

खुशनसीब है तू जो ज़मी पर तेरे साथ माँ  ..
आज जाना ऐसा होता है माँ का प्यार ...
अगले जन्म में  मैं भी तेरी माँ का बेटा बनकर जन्म लूँगा ...

Yogesh Ojha

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