यादें उसकी ...

चेहरा मेरा था ...
पर निगाहें थी उसकी ...
खामोशी में भी होती थी ...
बातें उसकी ....

मेरे चेहरे पर गज़ल लिखती गई ...
बलखाती हुई आँखे उसकी ....

खामोश लम्हों का पता दे रही थी ...
तेज़ होती हुई साँसें उसकी ...

ऐसे मौसम भी गुजारे है मैंने ...
जब सुबह मेरी होती थी और शामें उसकी ....

उसके दील में भी ये मौसम था कभी ...
जब आँखो में रहती थी हर पल यादें उसकी ....

एक फैसला कुछ यूँ हवाओं ने लिखा ...
और मीट गई ज़िंदगी से अदाएं उसकी ....

अक्सर रातों को टूटी नींद ये सोच कर ..
कैसे कट ती होंगी रातें उसकी ...

होता है क्यू ये अजब सा एहसास ...
दूर रहकर भी थामे रहती है सदा बाँहें उसकी .....

सच है या किसी सजदे का असर है ...
या रेह गई है बस यादें उसकी ....

Yogesh Ojha

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