क्या औरत खेलने के लिए बनी है???

आखिर क्यूँ एक औरत
खतरों से घिरी है
जंजालों में पड़ी है
पूछो खुदसे
क्या आपके घर की बच्चियां भी एक डर में पली बढ़ी है ...

कदम-कदम पे, चप्पे-चप्पे पे
हर रास्ते पे, गली कूचों में
हर जगह " जानवर " बैठे हैं
इन्तज़ार में ....
कि कब कोई वहाँ से गुजरे
और उनको रंगीन कर जाए
उनकी बोरियत भरी जिंदगी को
कुछ हसीन कर जाए ...

उनको ये मजाक लगता है
औरत का पीछा करना,
‘रोमांस’ लगता है ...
वो खुद ही कहते हैं कि
शायद कोई मर्द नहीं जिसने
औरत का पीछा न किया हो ....

क्यूँ ये भूल गए की ऐसा कोई मर्द नहीं जिसे औरत ने नहीं पैदा किया है ...

उन्हें एहसास ही नहीं
कि कोई लड़की  नहीं है देश में
जो कभी सुकून से जी सकी हो —
रास्तों में अकेले चलते हुए
चैन की सांस ले घूम सकी हो
ट्रेन, बस या चौराहों में
मर्दों की तरह बेफिक्र रह सकी हो ...

बहुत कुछ होता है एक औरत में
सिर्फ शरीर और मांस नहीं होता
औरत को देख के लार टपकाना,
पीछा करना रोमांस नहीं होता ....

हर वक़्त उसे डर है
खतरा उसके चारों ओर है
जाने कब कौन खुद को उसपे थोप देगा
फिर गला घोंट देगा
या फिर छलनी कर के
कही फेंक देगा ...

पांच साल की बच्ची हो या
अस्सी साल की बुढिया
मर्द कर रहे हैं सबका शिकार
कही कर रहे बलात्कार ...
तो कहीं मार रहे सीटियां
एक डर के साथ जी रही है आपके भी घर की बेटियाँ ...

औरतों का जीवन नरक कर दिया है
ये कौन सा समाज बना रहे हैं हम
सुधारो खुद को, थोड़ा तो सोचो
और आँख नहीं खुल रही हो
तो अपनी माँ-बहन से पूछो ....

Also read
Dedicated to DAMINI... May her soul lies in Peace..  http://www.positivecoloumn.co.in/2015/12/dedicated-to-damini-may-her-soul-lies.html

Yogesh Ojha

We are providing the best content out of the box.