पापा की ख्वाहिशें...

माँ को भूल ना पाते हो
पल भर मुझे भी याद करो ..
पापा...याद बहुत तुम आते हो ...
कभी तो ऐसा मुझसे कहो ..

हाँ मैने भी अपने दील में
जज़्बातों के साए दफनाए है
माँ तो होती ही है अपनी
पर पापा भी कहाँ पराए है ..

प्यार किया माँ ने हर पल
शायद मैंने कभी तुम्हे डाँट दिया ...
मेरे फूल से बच्चों को
कई बार मैंने रुला दिया ...

था मेरा अरमान
एक दिन तुम्हे दुनियाँ घुमाऊँगा
ग़म सहे जो मैंने उन्हे
तुमसे कोसों दूर भगाऊँगा ...

तुम्हरी चिंता करते करते
मै ज़िंदगी जीना भूल गया ...
अब वक्त आया जब जीने का ...
क्यूँ बाप से बच्चा रूठ गया ...

Yogesh Ojha

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