बिदाई!!!

वक्त की आँधी
कुछ यूँ थी आई
याद रहे ना वादे
कसमें भी धुँद्लाई ...

झील सी पलकें झिलमिलाई
लो जिंदगी की कहानी एक नया मोड़ है लाई ...

ना जाने का कभी दावा किया करती थी
और आज वो होगई पराई

कौन था आखिर वो बेदर्द
जिसने थी ये रीत बनाई
इस रीत के आगे
हर माँ की निगाहें बेबस नज़र आई ...

बेटियाँ ..
जो पापा की परी बनके थी दुनिया में आई
माँ की लाडो की क्यू होती हैं बिदाई ..
छूट सा गया सब्र अब भाई का भी ये केहते केहते ...

" अजब सी जो ये रीत हैं,
ये तुझे भी निभाना हैं ..
मै नहीँ जाउँगी मै नहीँ जाउँगी ये केहते हुए ही सही ...पर तुझे अब नई दुनिया बसाना हैं " ....

Yogesh Ojha

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