माँ कहीँ चुप ना होजाए

मुझे इतना प्यार ना दो माँ तुम
कल जितना मुझे नसीब ना हो...
मेरे सर पर हाथ तुम्हारा है
कल इसपर शिकन अजीब ना हो...
साये मे तुम्हरी बस
उम्र तमाम गुज़र जाए
अँचाल मे तुम्हारे
चाहे जाँच निकल जाए...
पर इतनी दूर ना जाना तुम
मै रोऊ और तुम करीब ना हो....
कल ऐसा ना हो
इस दुनियाँ मे
मै तन्हा अकेला रेह जाऊ
तुम्हारे प्यार से चिढ़ता हूँ
कल गुस्सा भी मूझे नसीब ना हो ...
अश्क लिये आँखो मे
नाना के घर से आई थी
जब जन्म लिया मैने
तुम फूली नहीँ समाई थी ...
दिन था आखरी बस वो
जब मे रोया तुम मुस्काई थी ...
माँ के प्यार को समझो तुम
कोई रिश्ता इससे अजीज़ ना हो ...
कहीँ ऐसा ना हो एक नगरी मे
तुम तन्हा अकेले बैठे हो
रो रो कर जब तुम थक जाओ
जिसके फोन काटा करते थे
फोन उन्हे तुम लगाना चाहो
कही इतनी देर ना होजाए
दिल ज़ख्मी लिये वो सोजाए
खूब जाए दूर कहीँ
और फोन मे बस खाली नंबर रेह जाए...
जिसकी बाते ना भाती है
वो खामोश कहीँ ना होजाए...

Yogesh Ojha

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