कुछ तो लोग कहेंगे !!!


कश्ती एहसासों की 
जब तेरी ओर बढ़ती है 
थम जाती है निगाहें 
साँसें कुछ इस तरह तेरी  शोर  करती है ...

हाल बेहाल होजाता है 
ख्वाहिशे जब थोड़ी और बढ़ती है 
लफ्जों का करोबार भी थम सा जाता है 
आँखे तेरी जब शोर  करती है ...

जो चलता है काफिला 
हमसफ़र ए हसीनों का 
सच होजाते है खामोश 
सिर्फ कसमे शोर करती है...

ये रिश्तों  के धागे है 
नाजुक पर  रंगीन होते है 
गर टूट जाए ये डोर 
तो अपने खामोश और पराए ज़्यादा शोर करते है ....

Yogesh Ojha

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